SEBI Cash Trading: SEBI की मार्जिन समीक्षा पर बाज़ार में बढ़ती उम्मीदें
SEBI Cash Trading: देश के पूंजी बाज़ार में हाल के महीनों में एक अहम चर्चा तेज़ हुई है—cash segment trades में लागू मार्जिन को कम करने की संभावना। बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इस विषय पर औपचारिक स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि यदि मार्जिन संरचना में बदलाव आता है, तो cash market में trading volume और निवेशकों की सक्रियता दोनों में ठोस बढ़त देखी जा सकती है।

SEBI से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक विशेष समिति ने clearing corporations, brokers और अन्य stakeholders के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की है। फिलहाल अंतिम निर्णय लंबित है, क्योंकि व्यापक डेटा अध्ययन की आवश्यकता जताई गई है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि SEBI ने इस दिशा में औपचारिक पहल कर दी है।
वर्तमान मार्जिन सिस्टम और उससे जुड़ी चुनौतियाँ
वर्तमान में cash segment trades पर 20 प्रतिशत का minimum margin लागू है, जिसमें Value at Risk margin और Extreme Loss Margin शामिल होते हैं। यह मार्जिन व्यवस्था बाज़ार की अस्थिरता से संभावित नुकसान को कवर करने के लिए बनाई गई है। हालांकि उद्योग में लंबे समय से यह सुझाव दिया जाता रहा है कि कई स्टॉक्स की वास्तविक volatility और उनकी fixed margin category के बीच अंतर है। कुछ स्टॉक्स जिनका जोखिम कम है, उन पर भी उच्च मार्जिन लगाया जाता है, जिससे liquidity प्रभावित होती है।
मार्जिन में rationalisation की आवश्यकता
SEBI समिति में शामिल सदस्यों की राय है कि वर्तमान मार्जिन अपेक्षाकृत अधिक है और इसे संतुलित करने की आवश्यकता है। समिति इस बात को भी सुनिश्चित करना चाहती है कि जोखिम प्रबंधन से कोई समझौता न हो और fair margin collection जारी रहे। इस rationalisation का उद्देश्य यह है कि cash market में participation बढ़े और investors को अधिक flexibility मिल सके।
cash market में SEBI की गहरी रुचि
पिछले तीन वर्षों में cash market volumes में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लेकिन equity derivatives की तुलना में यह वृद्धि अब भी काफी कम है। SEBI के चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने कई बार कहा है कि भारत के equity market को संतुलित करने के लिए cash segment का मजबूत होना आवश्यक है। उनका मानना है कि active Securities Lending and Borrowing mechanism और cash व derivatives market के बीच मजबूत interlinkage से price discovery और participation दोनों बेहतर होंगे।
बढ़ता turnover और आगे की संभावनाएँ
SEBI के उपलब्ध आँकड़ों से स्पष्ट है कि cash market का औसत daily turnover धीरे-धीरे बढ़ रहा है। FY20 में जहाँ यह लगभग 39,148 करोड़ रुपये था, वहीं FY25 तक यह 1,20,000 करोड़ रुपये के पार पहुँच चुका है। यह वृद्धि बताती है कि निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है और यदि मार्जिन में कमी आती है, तो यह संख्या और तेज़ी से बढ़ सकती है।
stakeholders से मिली विविध सुझाव
SEBI को cash market depth बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं। इनमें stock lending और borrowing model को बढ़ावा देना, Exchange Traded Funds की जागरूकता बढ़ाना, cash segment में intraday trades पर लागू Securities Transaction Tax हटाना या कम करना और मार्जिन को यथार्थवादी बनाना जैसे सुझाव शामिल हैं। इन सुझावों पर विस्तृत चर्चा के बाद इन्हें advisory committee के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
आगे का मार्ग
मार्जिन संरचना में कोई भी बदलाव बाज़ार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। यदि SEBI इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाता है, तो cash segment में liquidity, participation और overall efficiency—all में सुधार की संभावना है। निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों की निगाहें अब SEBI के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।

