Groww बना रहा है IPO मार्केट में हलचल मचाने की योजना, जानिए पूरी जानकारी
IPO: स्टॉक ट्रेडिंग वेबसाइट ग्रो, निवेश के नए दौर के लिए तैयार हो रही है। सूत्रों के अनुसार, व्यवसाय का इरादा $200 मिलियन या लगभग ₹1,660 करोड़ जुटाने का है। ग्रो ने इसके लिए मौजूदा निवेशक टाइगर ग्लोबल और सिंगापुर के सरकारी धन कोष GIC के साथ चर्चा शुरू कर दी है। अगर बिक्री हो जाती है तो बेंगलुरु की इस फर्म की कीमत $6.5 बिलियन (लगभग ₹54,000 करोड़) हो सकती है। यह न भूलें कि 2021 में ग्रो की कीमत केवल $3 बिलियन थी। ललित केशरे, हर्ष जैन, ईशान बंसल और नीरज सिंह ने नौ साल पहले ग्रो की स्थापना की थी। इसने म्यूचुअल फंड के वितरक के रूप में शुरुआत की, लेकिन तब से यह भारत में सबसे बड़ा स्टॉक ब्रोकर बन गया है।

ग्रो के नए दृष्टिकोण और IPO से बाजार में और मचेगी हलचल
ग्रो के IPO और नए दृष्टिकोण से बाजार में और हलचल मचेगी, लेकिन SEBI की सख्ती और F&O पर निर्भरता अभी भी समस्याएँ बनी रहेंगी। टाइगर ग्लोबल और GIC ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसके अलावा, ग्रो ने ET की पूछताछ का जवाब नहीं दिया।
यह पैसा ग्रो की आने वाली आरंभिक सार्वजनिक पेशकश की प्रस्तावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यवसाय अगले कुछ महीनों में IPO ड्राफ्ट दस्तावेज़ जमा कर सकता है। ग्रो का इरादा IPO के ज़रिए $700 मिलियन (लगभग ₹5,800 करोड़) इकट्ठा करने का है। IPO से पहले ग्रो ने अपना मुख्यालय अमेरिका से भारत में स्थानांतरित कर दिया था। यह कार्रवाई पिछले साल नवंबर में की गई थी।
Angel One और Zerodha से सीधी प्रतिद्वंद्विता
ग्रो एंजेल वन और जीरोधा से सीधी प्रतिस्पर्धा में है। NSE डेटा से पता चलता है कि फरवरी में ग्रो के 1.3 करोड़ सक्रिय ग्राहक थे, जबकि जीरोधा के 80 लाख और एंजेल वन के 77 लाख थे। पिछले दो सालों में पहली बार, पिछले महीने तक ग्रो के सक्रिय ट्रेडर्स में लगभग 2 लाख की कमी आई है।
वित्तीय स्वास्थ्य: ग्रो ने वित्त वर्ष 24 में ₹3,145 करोड़ कमाए, लेकिन अमेरिकी सरकार को कर चुकाने के कारण उसे ₹805 करोड़ का नुकसान हुआ। अमेरिका से भारत की ओर रुख (रिवर्स फ्लिप) इस नुकसान का कारण था।
सेबी की कार्रवाई: चूंकि ब्रोकरेज फर्मों की आय में एफएंडओ लेनदेन का हिस्सा 70% से अधिक है, इसलिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर सेबी की कार्रवाई ने उनके मुनाफे को नुकसान पहुंचाया है। जीरोधा के सीईओ नितिन कामथ ने पहले कहा था कि इससे इंडस्ट्री के ऑर्डर वॉल्यूम में 30% तक की गिरावट आ सकती है।